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Bihar Police Scam: मुजफ्फरपुर के 7 करोड़ रुपये के गबन मामले में पूर्व महिला सिपाही दोषी, 26 अक्टूबर को सजा पर सुनवाई

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | मुजफ्फरपुर में पुलिसकर्मियों के वेतन और सरकारी भुगतान से जुड़े 7 करोड़ रुपये से अधिक के गबन मामले में तत्कालीन महिला सिपाही बेबी कुमारी दोषी करार, 26 अक्टूबर को सजा पर सुनवाई।

मुजफ्फरपुर, 6 अक्टूबर, आलम की खबर: मुजफ्फरपुर में पुलिसकर्मियों के वेतन, यात्रा भत्ता और दूसरे सरकारी भुगतान से जुड़े करीब 16 साल पुराने वित्तीय अनियमितता मामले में अदालत ने तत्कालीन महिला सिपाही बेबी कुमारी को दोषी करार दिया है। विशेष निगरानी अदालत के फैसले के बाद उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया। अब 26 अक्टूबर 2026 को अदालत सजा के बिंदु पर सुनवाई करेगी।

मामले की शुरुआत वर्ष 2010 में हुई थी। एक अक्टूबर 2010 को तत्कालीन डीएसपी मुख्यालय की ओर से मुजफ्फरपुर नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। जांच आगे बढ़ी तो मामला पुलिसकर्मियों के वेतन और दूसरे सरकारी भुगतान की राशि में बड़े स्तर पर हेरफेर से जुड़ा मिला।

जांच में सामने आया कि वर्ष 2006 से सितंबर 2010 के बीच मुजफ्फरपुर पुलिस कार्यालय से पुलिसकर्मियों के वेतन, टीए और अन्य बिलों के भुगतान के लिए जारी सरकारी राशि को कथित तौर पर दूसरे बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया। इस मामले में तत्कालीन लेखापाल सुशील कुमार चौधरी की भूमिका भी जांच के केंद्र में रही।

जांच एजेंसियों के मुताबिक सरकारी राशि का एक हिस्सा तत्कालीन महिला सिपाही बेबी कुमारी के बैंक खाते में भी पहुंचा। जांच में उनके खाते में करीब 17 लाख रुपये ट्रांसफर होने की बात सामने आई। वहीं अन्य आरोपितों के खातों में भी बड़ी रकम पहुंचने का आरोप है।

मामला खुलने के बाद आरोपितों के ठिकानों पर तलाशी की कार्रवाई भी हुई। जांच से जुड़े रिकॉर्ड के अनुसार अलग-अलग परिसरों से नकदी, आभूषण और संपत्ति में निवेश से संबंधित दस्तावेज बरामद किए गए थे। इसके बाद बेबी कुमारी की संपत्ति और उनकी घोषित आय के बीच अंतर की भी जांच की गई।

35 लाख रुपये से अधिक की आय से अधिक संपत्ति

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की जांच के बाद बेबी कुमारी के खिलाफ 35 लाख 42 हजार 955 रुपये की प्रत्यानुपातिक धनार्जन यानी आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया था। इसी मामले में विशेष निगरानी अदालत में सुनवाई चली और अब अदालत ने उन्हें दोषी करार दिया है।

अदालत में बेबी कुमारी की ओर से अपनी संपत्ति और आय के स्रोत को लेकर पक्ष रखा गया था। वहीं अभियोजन पक्ष ने आय और संपत्ति के बीच सामने आए अंतर को मामले का महत्वपूर्ण आधार बताया। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि का फैसला सुनाया।

16 साल बाद मामले में अहम पड़ाव

यह पूरा प्रकरण वर्ष 2010 में दर्ज प्राथमिकी से शुरू हुआ था। इसके बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की जांच, आरोप-पत्र और अदालत में लंबी सुनवाई का दौर चला। करीब डेढ़ दशक से ज्यादा समय बाद अब इस मामले में बेबी कुमारी को दोषी ठहराया गया है।

दोषी करार दिए जाने के बाद उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है। अदालत ने सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 26 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की है। उस दिन अदालत यह तय करेगी कि दोषी करार दी गई पूर्व महिला सिपाही को किस प्रकार की सजा दी जाए।

अन्य आरोपितों पर भी चल रही कानूनी प्रक्रिया

इस मामले में तत्कालीन लेखापाल सुशील कुमार चौधरी और महिला सिपाही शकुंतला देवी समेत अन्य लोगों के नाम भी जांच में सामने आए थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कुछ आरोपितों के खिलाफ अलग से न्यायिक प्रक्रिया जारी है।

सरकारी राशि से जुड़े इस मामले में अदालत का फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आरोप पुलिसकर्मियों के वेतन और दूसरे सरकारी भुगतान के लिए निर्धारित राशि की हेराफेरी से जुड़ा था। अब बेबी कुमारी की दोषसिद्धि के बाद मामले की अगली निगाह 26 अक्टूबर की सुनवाई पर रहेगी।

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